कोलकाता स्प्रीचुअल म्यूजियम का गोल्डन जुबली समारोह

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ब्रह्माकुमारीज के कोलकाता स्प्रीचुअल म्यूजियम का गोल्डन जुबली समारोह धूमधाम से मनाया
– 50 वर्षों का इतिहास वीडियो और नृत्य नाटिका से दिखाया
– ब्रह्मा बाबा की प्रेरणा से किया गया था इस म्यूजियम का निर्माण
– दादियों और वरिष्ठ दीदियों का किया गया सम्मान

13 मार्च, आबू रोड (नि. प्र.) प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के कोलकाता में बनाए गए विशाल स्प्रीचुअल म्यूजियम का गोल्डन जुबली समारोह मंगलवार को शांतिवन के डॉयमंड हॉल में गरिमापूर्ण तरीके और धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में वीडियो और नृत्य नाटिका के माध्यम से कोलकाता म्यूजियम के 50 वर्षों का इतिहास दिखाया गया। वीडियो में दिखाया गया कि कैसे इस म्यूजियम की सेवाओं वैश्विक हुईं और इसकी विशेषता क्या है। इसके साथ ही किस तरह म्यूजियम की संकल्पना रखी गई और धीरे-धीरे कैसे अपने स्थापना के गौरवपूर्ण 50 वर्ष पूरे किए। इस म्यूजियम की संकल्पना साकार में प्रजापिता ब्रह्मा बाबा ने रखी थी। गौरतलब है कि ब्रह्मा बाबा का लौकिक परिवार कोलकाता में ही रहता था। साथ ही बाबा इस संस्था की स्थापना के पूर्व हीरे-जवाहरातों का कारोबार यहीं से संचालित करते थे।308084

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्था की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी जानकी ने कहा कि आज बहुत ही खुशी हो रही है कि ाज से 50 साल पहले जो आध्यात्मिक म्यूजियम कोलकाता में शुरू किया गया था उसके 50 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। इसके माध्यम से आज समाज के सभी वर्गों को लाभ मिला है और हजारों लोगों को जीवन बदला है। इस दौरान कोलकाता की ब्रह्माकुमारी बहनों ने सभी दादियों और वरिष्ठ भाईयों का मुकुट पहनाकर और चुनरी ओढ़ाकर सम्मान किया।

संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका दादी रतनमोहिनी ने कहा कि इसी तरह ये म्यूजियम आध्यात्मिक शक्तिकेंद्र बनकर लोगों के जीवन में प्रकाश का उजाला करता रहेगा। जनरल मैनेजर बीके मुन्नी बहन ने कहा कि बाबा की प्रेरणा से कोलकाता में सेवाओं का विस्तार और तेज गति से होता रहे ऐसी शुभ भावना और शुभ कामना है। पश्चिम बंगाल कोलकाता क्षेत्र की डायरेक्टर कानन बहन ने कहा कि आज बहुत ही खुशी का अनुभव हो रहा है कि जिस म्यूजियम की स्थापना बाबा की प्रेरणा से आज से 50 साल पहले जो नींव रखी गई थी वह आज हजारों लोगों के जीवन परिवर्तन का केंद्र बना है। संस्था के इतिहास में यह पहला आध्यात्मिक म्यूजियम है। महोत्सव में कोलकाता की बीके चंद्रा बहन, बीके तृषाली बहन ने भी अपने विचार व्यक्त किए।